चीनी सैनिक ने कहा, "हम भारत से युद्ध नहीं चाहते, हमे जानबूझकर मौत के मुँह में भेज रहे जिनपिंग"



भारत से युद्ध लड़ने की बात कह रहे चीन को उसकी फौज ने तगड़ा झटका दिया है। चीनी सेना बगावत पर उतर आई है

चीन के सैनिकों ने वहां की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सैनिकों का कहना है कि उन्हें खाने पीने की जरूरी चीजें और अत्याधुनिक हथियार नहीं दिए जा रहे हैं। चीनी सेना ने ये भी कहा कि उन्हें तीन महिने की पगार तक नहीं मिली है। ऐसे में वो भारत के साथ युद्ध नहीं लड़ सकते। सैनिकों का कहना है कि सरकार उन्हें जानबूझकर मौत के मुंह में घकेल रही है।

बता दें कि चीन की आर्थिक हालत इतनी खराब है कि वो अपने सैनिकों को सैलरी नहीं दे पा रहा है। हाल ही में उसने दस लाख सैनिकों को सेना से बाहर कर दिया है।

इसको लेकर करीब 1000 से अधिक फौजी प्रदर्शनकारियों ने चीनी रक्षा मंत्रालय के सामने जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी राजधानी बीजिंग स्थित मौजूद सेना मुख्यालय भवन के बाहर कई घंटों तक के खड़े रहे और प्रदर्शन किया। कई सारे प्रदर्शनकारियों ने सैनिकों जैसी हरी पोशाक पहनी हुई थी। 

चीनी सेंसर डिपार्टमेंट ने सोशल मीडिया पर चीनी रक्षा मंत्रालय व् भूतपूर्व सैनिकों से जुड़े सर्च को सोशल मीडिया पर पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है।

सेना में संरचनात्मक सुधार पर आधारित लेख के अनुसार, सैनिकों की विशाल तादाद पर आधारित पुरानी सैन्य संरचना को सुधार के बाद बदल दिया जाएगा। साल 2015 में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सेना से तीन लाख सैनिकों को कम करने का ऐलान किया था।

रिपोर्ट के अनुसार, पीएलए नौसेना, पीएलए सामरिक सहायता बल और पीएलए रॉकेट बलों में सैनिकों की संख्या को बढ़ाया जाएगा, जबकि पीएलए वायुसेना के सक्रिय सेवा कर्मियों की संख्या उतनी ही रहेगी। वीचैट के लेख में कहा गया कि, यह सुधार चीन के सामरिक लक्ष्यों और सुरक्षा आवश्यकताओं पर आधारित है। पूर्व में पीएलए ने जमीनी लड़ाई और गृहभूमि रक्षा पर ध्यान केंद्रित किया हुआ था जिसे अब मौलिक परिवर्तनों से गुजरना होगा।

चीन ने पिछले दो वर्षों में अपने रक्षा खर्च में कटौती की है। राष्ट्रपति शी कम लेकिन आधुनिक सैन्य बल चाहते हैं। चीन एक प्रमुख समुद्री शक्ति बनकर उभरा है और इसके अन्य देशों के साथ भूमि विवाद से ज्यादा समुद्री विवाद हैं। 14 पड़ोसियों से घिरे चीन का भूमि विवाद केवल भूटान और भारत के साथ है।

 ग्लोबल टाइम्स ने चीन के शस्त्र नियंत्रण एवं निरस्त्रीकरण संगठन के वरिष्ठ सलाहकार शू गुआंगयू के हवाले से बताया कि, यह सुधार पीएलए रॉकेट बल, वायु सेना, नौसेना और सामरिक सहायता बल (मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और संचार के लिए जिम्मेदार) सहित अन्य सेवाओं को अधिक संसाधन प्रदान करेगा और पीएलए विदेशी मिशनों को संचालित करने के लिए अपनी क्षमता को मजबूत करेगी।