बहुत बड़ा खुलासा : आतंकियों को आधी रात को बॉर्डर से भारत में घुसाते है अलगाववादी !


जम्मू कश्मीर पुलिस ने रविवार को हिज्बुल मुजाहिद्दीन के एक बड़े रिक्रूटमेंट मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है।
जम्मू कश्मीर पुलिस में उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तार हिज्बुल आतंकी अब्दुल राशिद भट्ट ने अलगाववादी संगठनों की कथित सिफारिश पर कानूनी रूप से वैध वीजा हासिल कर आतंक की ट्रेनिंग लेने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर गया था।

बारामुला पुलिस द्वारा गिरफ्तार दो अन्य गिरफ्तार लोगों की पहचान अंसारुल्लाह और मेहराजुद्दीन काक के रूप में हुई है।

गिरफ्तार अब्दुल राशिद भट मई महीने में पाकिस्तान गया था और पाक अधिकृत कश्मीर स्थित हिज्बुल के खालिद बिन वलीद कैंप में ट्रेनिंग ली थी। मेल टुडे की खबर के मुताबिक भट ने पूछताछ में बताया कि हुर्रियत के गिलानी धड़े की सिफारिश पर नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग से वीजा मिला था।

एके-47 और ग्रेनेड चलाने की ट्रेनिंग : 

वैध तरीके से अटारी के रास्ते वाघा बॉर्डर होते हुए भट पाक अधिकृत कश्मीर पहुंचा, जहां हिज्बुल मुजाहिद्दीन का गुर्गा उसे कैंप तक ले गया। इस कैंप में 10 से 12 कश्मीरियों के साथ भट ने मेजर आतिफ (बदला हुआ नाम) से ट्रेनिंग ली। इन सबको आपस में निजी बातें करने की अनुमति नहीं थी।

कैंप में सभी आतंकियों को एके-47 और ग्रेनेड चलाने की ट्रेनिंग दी गई। भट ने पुलिस को बताया कि उन्हें स्कूल और अस्पताल जैसे कैंपों में ट्रेनिंग दी गई। ट्रेनिंग के बाद भट वापस घाटी लौटा और दूसरे लड़कों को हिज्बुल में भर्ती करने के लिए काम करने लगा।

पाकिस्तान उच्चायोग कर रहा आतंकियों की मदद : 

आईजी मुनीर खान ने कहा, 'साल डेढ़ साल में यह कम से कम पांचवां मामला सामने आया है जब आतंकियों ने एलओसी पार करने के लिए आधिकारिक दस्तावेजों का उपयोग किया हो।' जम्मू कश्मीर पुलिस अलगाववादी संगठनों पर अपनी रिपोर्ट जल्द ही सरकार सौंपेगी, जो देशद्रोही तत्वों को मदद करते आ रहे हैं।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'अब यह केंद्र पर है कि इस मामले को पाकिस्तान के सामने उठाना है या नहीं। लेकिन यह साफ है कि आतंकियों को अलगाववादी संगठनों का खुला समर्थन मिल रहा है और पाकिस्तान उच्चायोग भी इसमें मदद कर रहा है।'

पाकिस्तानी एजेंटों के खिलाफ एक्शन क्यों नहीं

सुरक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल (रिटायर्ड) पीके सहगल ने मेल टुडे से कहा, 'भारतीय सुरक्षा बलों के खिलाफ साजिश रचने के लिए पाकिस्तान हर तरीका अपना रहा है। उनकी पोल खुल चुकी है लेकिन सवाल ये है कि कथित पाकिस्तानी एजेंटों के खिलाफ अब तक कोई एक्शन क्यों नहीं हुआ।'

उन्होंने कहा कि अलगाववादियों के आतंकी सैयद सलाहुद्दीन के साथ लिंक हैं। अब हमारे पास ज्यादा सबूत भी हैं। सवाल ये है कि सुरक्षा एजेंसियों ने अलगावादी नेताओं को गिरफ्तार क्यों नहीं किया है। इस मामले को एनआईए को दिया जाना चाहिए।

वाघा बॉर्डर का यूज कर रहे आतंकी : 

भट का केस बेहद चौंकाने वाला है क्योंकि यह पहली बार नहीं है कि आतंकियों ने पाकिस्तान जाने के लिए वैध रूट का इस्तेमाल किया हो। चार फरवरी को दो आतंकी कुपवाड़ा का अजहर खान और बोमोई सोपोर का रहने वाला सजाद लोन अमरगढ़ सोपोर में सुरक्षा बलों के साझा अभियान में मारे गए।

जम्मू कश्मीर पुलिस की जांच में पाया गया कि इन आतंकियों ट्रेनिंग हासिल करने के लिए लीगल रूट पकड़ा था और वाघा बॉर्डर के जरिए एलओसी पार गए थे। मारे गए दोनों आतंकी 2015-16 में वाघा बॉर्डर के जरिए पाकिस्तान गए थे। सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा बल इन दोनों को खत्म करने के लिए पिछले एक साल से एक्टिव थे और आखिर में उन्हें एनकाउंटर में मार गिराया।

परवेज वानी चला रहा हिज्बुल के इस मॉड्यूल को

सीलू सोपोर का रहने वाला और मार्च महीने में एक मर्डर केस में गिरफ्तार हिज्बुल कमांडर इरशाद ख्वाजा ने इस साजिश की पुष्टि की थी।

सूत्रों का कहना है कि इस मॉड्यूल को उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में गगलूरा हंदवाड़ा का रहने वाला हिज्बुल कमांडर परवेज वानी चला रहा है। मॉड्यूल की योजना वैध वीजा के जरिए ज्यादा से ज्यादा लड़कों को आतंकी ट्रेनिंग दिलवाने के लिए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भेजने की है।

एसएसपी बारामुला इम्तियाज हुसैन ने कहा, 'अपने कॉडर को मजबूत करने के लिए आतंकी समूह के मास्टर माइंड लड़कों को फंसाने के लिए नए नए तरीके आजमा रहे हैं। हमारी कोशिश इसे रोकने की है। अभी तक हमने 10 से ज्यादा लड़कों को आतंकियों के साथ जाने से बचाया है और आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त किया है।'

 बारामुला पुलिस ने 10 लड़कों को छुड़ाया : 

रविवार को गिरफ्तार हुए आतंकियों के पास हथियार, गोला बारूद और 1 लाख रुपया कैश में बरामद हुआ है। यह मॉड्यूल केवल नए लड़कों को ही नहीं लुभा रहा है बल्कि अन्य आतंकी समूहों को लॉजिस्टिक मदद भी उपलब्ध करा रहा है।

बारामुला पुलिस की यह बड़ी कामयाबी है कि उसने 10 लड़कों को आतंकियों के चंगुल से छुड़ाया है और उन्हें परिवार को सौंप दिया है।

इस बीच जम्मू कश्मीर पुलिस एजेंसियों के साथ मिलकर वाघा रूट पर निगाह रख रही है। पुलिस ने कहा कि हम सभी की प्रोफाइल नहीं बना सकते और न ही सबको वैध रास्ते के जरिए सीमा पार जाने से रोक सकते हैं। लेकिन हमारी कोशिश एक ऐसा ढांचा बनाने की है, जिसके जरिए इन तत्वों पर निगाह रखी जा सके।