चीन हमारा देश हड़पना चाहता है, जबतक नरेंद्र मोदी हैं चीन हमारा कुछ नहीं बिगड़ सकता : भूटान


सरहद पर चीन और भारत में तनाव के बीच भूटान भी चर्चा में है। जिस डोकलाम सीमा पर विवाद है वह भूटान और चीन के बीच है।
चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने आरोप लगाया है कि भारत अपने हितों को साधने के लिए भूटान का इस्तेमाल कर रहा है।

ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि भूटान की सीमा चौकी पर भारत ने बेवजह आकर टांग अड़ाई है। चीन के इस सरकारी अख़बार ने लिखा है, ''अतीत में चीन और भूटान सीमा पर कई घटनाएं हुई हैं। 

सभी का समाधान रॉयल भूटान आर्मी और चीनी आर्मी के बीच होता रहा है। इसमें कभी भारतीय सैनिकों की ज़रूरत नहीं पड़ी है। अख़बार ने आगे लिखा है, ''इसमें कोई शक नहीं है कि भूटान में भारतीय सैनिकों की मौजूदगी है और भूटानी आर्मी को भारत ट्रेनिंग और फंड मुहैया कराता है। भारत ऐसा भूटान की सुरक्षा के लिए नहीं करता है बल्कि ऐसा वह अपनी सुरक्षा के लिए करता है। यह भारत का चीन के ख़िलाफ़ सामरिक योजना के तहत है।''

इस बीच राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के मुखपत्र ऑर्गेनाइजर के पूर्व संपादक शेषाद्री चारी ने ट्वीट कर कहा है, ''चीन अग्रिम रूप से अपनी योजना तैयार कर रहा है। 1948 में माओ ने इसी तरह तिब्बत को अपने कब्ज़े में लिया था। क्या वर्तमान तनाव भूटान को दूसरा तिब्बत बनाने का हिस्सा है?''

अपने अगले ट्वीट में चारी ने लिखा है, ''चीन पीओके के ज़रिए सीपीईसी को अंजाम दे रहा है। ऐसे में भारतीय प्रधानमंत्री को येरुशलम और वेस्ट बैंक क्यों नहीं जाना चाहिए? इतिहास बदल रहा है इसलिए इसका असर भूगोल पर भी पड़ेगा।''

हालांकि डोकलाम पर चीन और भारत के बीच तनाव को लेकर भूटानी मीडिया उस तरह से आक्रामक नहीं है। दूसरी तरफ़ चीनी और भारतीय मीडिया में इस तनाव पर आक्रामकता आसानी से महसूस किया जा सकता है। भूटान के सरकारी अख़बार क्यून्सेल ने डोकलाम के पास चीन द्वारा सड़क बनाए जाने पर चिंता जाहिर की है।

इस भूटानी अख़बार ने लिखा है, ''भूटान और चीन के बीच जिन चार इलाक़ों को लेकर विवाद हैं उनमें डोकलाम एक है।'' 29 जून को भूटान के विेदेश मंत्रालय ने चीन से कहा था कि उसे यथास्थिति का पालन करना चाहिए। भूटान ने कहा था कि चीन डोकलाम के पास कोई निर्माण करता है तो यह दोनों देशों के बीच सीमा समझौते का उल्लंघन होगा।

एक और भूटानी अख़बार ने फ़ेसबुक पर अपने संपादक की टिप्पणी पोस्ट की है, ''पहले रॉयल भूटान आर्मी ने चीन के सड़क निर्माण को रोकने की कोशिश की लेकिन चीनी टीम ने इसमें सहयोग करने से इनकार कर दिया। इसके तत्काल बाद इस इलाक़े में भारतीय सैनिक आए और सड़क निर्माण को रोका गया। इसके बाद चीनी सेना ने प्रतिक्रिया में भारतीय सैनिकों की छोटी चौकियों को नष्ट कर दिया।''

एक और अख़बार बिज़नेस भूटान ने लिखा है, ''भारतीय और भूटानी आर्मी के साथ तीन हफ़्तों से जारी गतिरोध के बावजूद चीनी आर्मी डोकलाम के पास निर्माण सामग्री पहुंचाने में लगी हुई है।''