समय की मांग है की हम भारत की कंपनियों को सपोर्ट करें, क्वालिटी और फीचर सब आएँगी !



नोट : हम नहीं कह रहे की आपके पास जो चीनी उत्पाद है उसे आप फेंके, जी नहीं ये बेकूफ़ी होगी 
उसके पैसे तो आप चीन को दे ही चुके हो 
हम कह रहे है की आगे चीनी उत्पाद मत लो, जो है उसका प्रयोग करो 

अब आइये असल मुद्दे पर 
अक्सर डायलॉग मारते है लोग, ये लोग दूर की नहीं देखते, नजदीक की देखकर कहते है की 
यार इंटेक्स, मिक्रोमैक्स, लावा में वो मजा नहीं है, यार भारत के उत्पाद में क्वालिटी नहीं है, और ऐसा कहकर ये लोग ओप्पो, वीवो, रेडमी इत्यादि खरीदते रहते है 

जापान वाले तो चीनी माल नहीं खरीदते, अमरीका वाले भी रेडमी, ओप्पो नहीं खरीदते 
पर हम खूब खरीदते है, कारण भी है 

हमने शुरू से ही अपने माल को निम्न दर्जे का समझ रखा है, शुरू से ही 1960 के ज़माने से ही हम ऐसे ही है 
और आज ये सच भी है की भारतीय कम्पनियाँ पिछड़ी हुई है 
और उसका कारण भी हम ही है 

होता क्या है की, हर कंपनी हर सेक्टर का एक रिसर्च एंड डेवलपमेंट डिपार्टमेंट होता है जिसे R&D भी कहते है 
कम्पनियाँ इसपर पैसा खर्च कर नयी नयी तकनीक, क्वालिटी लाने का काम करती है 
ये ऐसा डिपार्टमेंट है जो खूब पैसा खाता है 
कंपनी के पास पैसा होगा तो ही R&D पर खर्च कर सकती है 

हम तो शुरू से ही भारतीय कंपनियों के माल को ख़राब कहकर खरीदते ही नहीं है, सारा पैसा चीन भेजते रहते है, चीनी कंपनियों के पास खूब पैसा है वो R&D करती रहती है और नए फीचर, क्वालिटी प्राप्त करती है 
हमारी भारतीय कम्पनियाँ बिचारि पिछड़ी हुई है, हम अपनी कंपनियों का माल खरीदते नहीं
भारत की कंपनियों के पास पैसा अच्छा आता ही नहीं, R&D पर खर्च हो ही नहीं पाता 

वहीँ जापान, अमरीका, यूरोप के लोग अपने उत्पादों को शुरू से ही बढ़ावा देते रहे 
उनकी कम्पनियाँ आज शिखर पर है, R&D का खूब पैसा है
जैसे अमरीका में मोटोरोला और एप्पल चलता है, सैमसंग LG बहुत कम, और चीनी उत्पाद तो बहुत ही कम 

आज हमारी कम्पनियाँ पिछड़ी हुई है, समय की मांग ये है की आज से हम भारत को, भारत की कंपनियों को सपोर्ट करें, और 20-25 सालों में हम आत्मनिर्भर रहेंगे 
वरना आने वाली पीढ़ी भी इसी तरह के पोस्ट लिखा करेंगी, की हम बड़े वाले C है