म्यांमार ने कहा, "भारत से हमारा आत्मीय संबंध, म्यांमार हर स्तिथि में भारत के साथ खड़ा रहेगा"



भारत चीन के बढ़ते तनाव के बीच म्यांमार ने भारत को पिता समान देश बताया है। म्यांमार के सेना प्रमुख ने कहा है कि वो चीन के खिलाफ भारत के साथ हैं।

म्यांमार के सेना प्रमुख आठ दिनों के लिए भारत आ रहे हैं। उन्होंने दिल्ली पहुंचने से पहले कहा है कि भारत जैसे बड़ा लोकतंत्र उनके देश के लिए पिता तुल्य है। चीन अगर भारत को धमकाएगा तो हम चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि भारत-चीन बॉर्डर पर म्यांमार की सेना भारतीय फौज का साथ देगी।  

म्यांमर के सेना प्रमुख सीनियर जनरल मिन ओंग ह्लैंग की 14 जुलाई को यहां पीएम नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री अरुण जेटली और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत दोवाल से मिलने की योजना है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत म्यांमार को आगे सैन्य आपूर्ति करने के लिए भी तैयार है।  ऐसा चीन की देश में रणनीतिक पैठ का सामना करने के लिए किया गया है। यह दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) देशों के साथ रक्षात्मक सहयोग को विस्तार देने की योजना का हिस्सा है।

पहले ही भारत म्यांमार को कई तरह के हथियार, रॉकेट लॉन्चार, रडार, कम्यूनिकेशन गियर, नाइट—विजन डिवाइसेज आदि देता है। इसे और आगे बढ़ाने की योजना है।

वहीं, इससे पहले खबर थी कि भारत गणतंत्र दिवस पर आसियान देशों को न्यौता दे सकता है। वहीं, दक्षिण चीन सागर में चीन के दावे को लेकर कुछ आसियान राष्ट्रों का खुद चीन से टकराव चल रहा है। ऐसे में ये कदम बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

बता दें कि इस वक्त भारत और चीन के बीच डोका ला क्षेत्र में चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस क्षेत्र में चीन ने सड़क निर्माण की कोशिश की थी जिसका भूटानी सेना ने विरोध किया था। भूटानी सेना की मदद के लिए आई भारतीय सेना और चीन की सेना अब आमने-सामने आ गई है।

 सीमापार म्यांमार के विशाल व घने जंगलों में अब भारत व म्यांमार का संयुक्त सैन्य अभियान चलाया जाएगा। नागालैंड व मिजोरम के उग्रवादी अब म्यांमार के जंगलों में सुरक्षित पनाह नहीं ले सकेंगे। भारत व म्यांमार के सेनाध्यक्षों के बीच इस आशय का समझौता हुआ है। भारत के थल सेनाध्यक्ष मेजर जनरल विपिन रावत के नेतृत्व वाली सैन्य शिष्टमंडल व म्यांमार के डिफेंस सर्विसेज के कमांडर इन चीफ मिन आँग ह्लेइंग के नेतृत्व वाली सैन्य शिष्टमंडल के बीच गया के आॅफिसर ट्रेनिंग एकेडमी में उपर्युक्त आशय की सहमति बनी।

गौरतलब है कि नागालैंड की नेशनल काउंसिल ऑफ नागालैंड खापलांग गुट व मणिपुर के कई उग्रवादी गुटों द्वारा उत्तर पूर्वी राज्यों में आतंकी घटना को अंजाम देने के बाद म्यांमार के घने व विशाल जंगलों में पनाह मिल जाता था। अभी भी म्यांमार के जंगलों में लगभग 200 शिविर बने हुए हैं । 

चीन से म्यांमार पहुंचने वाले हथियार व ड्रग्स की तस्करी भी उग्रवादी संगठनों द्वारा की जाती है। भारत इससे निपटने की योजना पर काम कर रहा था। लेकिन आंग सान सू की की पार्टी नेशनल लीग फाॅर डेमोक्रेसी जब म्यांमार की सत्ता में आई और पिछले वर्ष जब वहां के राष्ट्रपति यू थिन क्याव जब भारत आये तब इसकी पटकथा लिखी गई थी। इसे दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों ने अमलीजामा पहनाया।