चीनी मीडिया ने कहा, "ये मोदी है नेहरू नहीं, अरुणांचल के चक्कर में कहीं तिब्बत न चला जाये"


चीन की मीडिया ने ही अब अपनी सरकार को नसीहत दी है कि वो भारत से सतर्क रहे।
चीन के ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि भारत से चीन को सतर्क रहना चाहिए। ये 1962 नहीं 2017 है। भारत के प्रधानमंत्री पद पर नेहरू जैसा इंसान नहीं मोदी बैठा है जो दुनिया भर में ख्याति प्राप्त कर चुका है। ऐसे में अगर भारत से जंग लड़ी गई तो चीन को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। तिब्बत पर चीन की संप्रभुता को खतरा हो सकता है। 

ग्लोबल टाइम्स के संपादकीय में कहा गया है कि भूटान की डिप्लोमेटिक और रक्षा संप्रभुता को दोबारा कायम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर चीन को इसकी अगुवाई करनी चाहिए। ग्लोबल टाइम्स का प्रकाशन चीन की सत्ताधारी पार्टी का आधिकारिक अखबार पीपुल्स डेली करता है. ग्लोबल टाइम्स अपने हार्डहिंटिग विचारों के लिए जाना जाता है।

तिब्बत को लेकर बेहद संवेदनशील चीन हमेशा अपनी वन चाइना पॉलिसी को लेकर सजग रहा है। हर सम्मेलन में दूसरे देशों को इस बारे में हिदायत देता रहा है और तिब्बत-ताइवान पर अपनी स्थिति रेखांकित करता रहा है। भारत के लिए भी यह एक संवेदनशील मसला रहा है।

तिब्बत पर चीन के चिंताओं के बावजूद ग्लोबल टाइम्स ने सुझाया है कि सिक्किम की मान्यता पर बीजिंग को दोबारा विचार करना चाहिए और भूटान को इस बात के लिए तैयार करना चाहिए कि वह भारत के साथ अपने संबंधों को पुर्नभाषित करे और चीन के साथ औपचारिक राजनीतिक संबंध स्थापित करे।

बता दें कि बीते सालों में चीन भारत के दलाई लामा कार्ड को लेकर परेशान रहा है। हालांकि भारत ने दलाई लामा कार्ड का खूब इस्तेमाल किया है और तिब्बत के सवाल पर अब इसका कोई खास असर नहीं होने वाला है। अखबार ने कहा है कि बीजिंग अगर भारत के खिलाफ सिक्किम कार्ड का इस्तेमाल करता है तो नई दिल्ली के लिए इसकी काट ढूंढ़ पाना मुश्किल होगा।