बंद हो 7 लाख 32 हज़ार बलिदानियों का भद्दा अपमान, उनके बलिदान से आज़ादी आयी है


वो अपने फ़िल्मी डायलॉग तो सुना ही होगा 
ये फ़िल्मी ही डायलॉग है, जिसे कांग्रेस और अन्य सेकुलरों ने आपके मन मस्तिष्क में भर दिया 
ये सेकुलरिज्म का जहर ही है 

"दे दी हमे आज़ादी बिना खडग बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल"

ये चाटुकारों ने मोहनदास गाँधी के बारे में कही है 

नोट : साबरमती का संत - मोहनदास गाँधी कोई संत नहीं था, संत अनेकों महिलाओं ने साथ नग्न नहीं सोते, संतों का अपमान बंद हो 

और दूसरी चीज बिना खडग बिना ढाल आज़ादी मोहनदास गाँधी ने दिला दी 
मतलब भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद जैसे क्रांतिकारिओं का कोई योगदान ही नहीं है, सुभाष चंद्र बोस का कोई योगदान ही नहीं है 

लाखों लाख लोग आज़ादी के लिए अंग्रेजों के सामने आते थे 
साइमन कमीशन ने हज़ारों की हत्या कर दी, जलियावाला बाग में आज़ादी की मांग कर रहे हज़ारों लोगों की हत्या हुई 
इन तमाम भारतियों ने अपना बलिदान आज़ादी के लिए दिया

1857 में आज़ादी का बड़ा संघर्ष शुरू हुआ और ये 1947 तक चला, अंग्रेजी आंकड़ों के अनुसार उन्होंने 
इस दौरान 7 लाख 32  हज़ार भारतियों को मारा, ये तो उनके आंकड़े है 
ये 20 लाख से भी अधिक हो सकता है 

अब आप बताइये 7 लाख 32 हज़ार भारतीय जिन्होंने अपना बलिदान दे दिया 
उनका कोई  योगदान नहीं है, पर हम  बस एक फ़िल्मी डायलॉग मारकर उन लाखों भारतीयों का अपमान करते रहेंगे जिन्होंने हमारे भविष्य के लिए, वर्तमान के लिए अपने प्राणो की आहुति दी 

ठीक है चाटुकारों मोहनदास गाँधी की भक्ति करनी है करो, तुम्हारी मर्जी है 
पर लाखों लाख भारतीय जो बलिदानी हुए उनका भद्दा अपमान बंद करो, आज़ादी बिना खडग बिना ढाल मोहनदास गाँधी ने नहीं बल्कि लाखों लाख भारतीयों के बलिदान ने दिलाई 

गाँधी गाँधी करने वालो जरा याद कर लो उन 7 लाख 32 हज़ार बलिदानियों का भी बलिदान