दुनिया भर के कट्टरपंथी जिहादियों की आँखों की किरकिरी बन चुके है ये 5 नेता !!


* बेंजामिन नेतन्याहू

आख़िर इजरायल से तमाम मुस्लिम क्यों चिढ़े रहते हैं. इस सवाल का जवाब जानने के लिए आपको इजरायल के उदय को समझना होगा. इजरायल दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जहां की बहुसंख्यक आबादी यहूदी है. इजरायल एक छोटा देश है पर उसकी सैन्य ताक़त का दुनिया लोहा मानती है. अनौपचारिक रूप से कहा जाता है कि इजरायल परमाणु शक्ति संपन्न देश है और अपनी ताक़त के दम पर ही अस्तित्व में है. 

इजरायल के पड़ोसी देशों फिलीस्तीन, मिस्र, लेबनान, जॉर्डन और अन्य के साथ संबंध अच्छे नहीं हैं, क्यूंकि इजरायल का उदय इन तमाम मुस्लिम देशों के साथ युद्ध के साथ हुआ था। इसके साथ ही इजरायल की सीमा पर लगते आतंकी समूह हमास द्वारा शासित एवं मुस्लिम देशों द्वारा फंडेड विवादित क्षेत्र गाजा पट्टी में इजरायल द्वारा प्रति दिन होते हमले और उसकी मुस्लिम विरोधी नीतियों के चलते मुस्लिम देशों से भारी कड़वाहट है। हाल ही में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मुस्लिमों की ‘आजान’ प्रथा को लेकर उनपर निशाना साधा और ‘अज़ान’ को राष्ट्र विरोधी तथा ‘ शोर मचाने ‘ वाला बताया था।

* नरेंद्र मोदी 

2002 के गुजरात के गोधरा में हुए हिन्दू-मुस्लिम दंगों के समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। इसके अलावा प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी पर मुस्लिम विरोधी होने का कोई भी दावा करना व्यर्थ है। अधिक से अधिक उन पर मुस्लिम विरोधी का दावा करने वाले उनके विरोधी कह सकते हैं कि वो आरएसएस सन्गठन से जुड़े हैं, जो देश के हिन्दुओं का सबसे बड़ा सन्गठन है। मगर आरएसएस से जुड़े रहना मात्र ही उनका मुस्लिम विरोधी होना नहीं हो सकता है, क्यूंकि आरएसएस से खुद ढेरों मुस्लिम भी जुडें हैं। 

मगर गुजरात का गोधरा काण्ड मोदी के जीवन का अस्त नहीं बल्कि उदय का कारण बना और 2014 में वे पूर्ण बहुमत की सरकार के प्रधानमन्त्री बने। उनको इंदिरा गांधी के बाद इतने बड़े बहुमत से जीत हासिल करने वाला प्रधानमन्त्री माना गया। उनकी पार्टी के नाम पर नहीं, बल्कि लोगों ने मोदी के नाम पर वोट भी दिया। हालाँकि प्रधानमन्त्री मोदी ने आज तक एक भी मुस्लिम विरोधी टिप्पणी तक नहीं की, मगर गोधरा काण्ड ने उनकी छवि एक मुस्लिम विरोधी नेता के रूप में बना दी जिन्हें कट्टर हिन्दुओं का बहुमत प्राप्त हुआ और वो आज मुस्लिम समुदाय के ढेरों लोगों के समर्थन के बावजूद, अधिकतर मुस्लिमों की आँखों की किरकिरी बन चुके हैं।

* डोनाल्ड ट्रम्प

एक टीवी ऐंकर से बिजनस टाइकून और अब दुनिया के सबसे ताकतवर अमेरिका के राष्ट्रपति पद तक का सफर तय करने वाले डॉनल्ड ट्रंप अकसर अपनी टिप्पणियों की वजह से सुर्खियों और विवादों में रहे हैं। ट्रंप चुनाव के समय मुस्लिम विरोधी बयान के चलते सुर्खियों में रहे हैं। दिसंबर, 2015 में उन्होंने पहली बार कहा था कि अमेरिका में आतंकवादी हमले रोकने के लिए मुसलमानों के अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगाना जरूरी है। 

ट्रंप ने अपने एक ब्यान में मुसलमानों के लिए कहा था कि – ‘दुनिया के एक चौथाई यानी हर चौथे मुस्लिम आतंकवादी है और किसी न किसी प्रकार से वह आतंकी घटनाओं में लिप्त रहता है।’ उनके इस ब्यान पर दुनिया भर में चर्चा का विषय बना था। ट्रंप ने फॉक्स न्‍यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कहा था, ‘आतंकियों जैसी सोच रखने वाले मुस्लिम 27 फीसदी हैं। अगर युद्ध जैसी नौबत आई तो यह संख्या 35 फीसदी भी हो सकती है। नफरत बढ़ती जा रही है।’ इन्हीं बयानों के कारण ट्रंप मुसलमानों की आँखों की किरकिरी बने रहे हैं। उनके इस्लाम समर्थक बयानों पर भी बुद्धिजीवी मुस्लिम वर्ग को कभी भरोसा नहीं होता।

* व्लादिमीर पुतिन 

सीरिया में आईएसआईएल या दाइश सहित ढेरों बड़े आतंकियों के ठिकानों पर रूस द्वारा हवाई हमलों के साथ ही क्षेत्र और क्षेत्र के बाहर इन गुटों के समर्थक मुस्लिमों का विरोध शुरु हो गया था। वहीं कुछ विरोधी मुस्लिमों को अपने विरोध की वजह ही समझ में नहीं आ पायी तो वे बेबुनियाद दावे करने लग गये और दावे करने लग गये कि रूस के राष्ट्रपति पुतिन, सुन्नी मुसलमानों को तबाह करने की कोशिश में हैं। आतंकी संगठन फ़्री सीरियन आर्मी के सरग़ना रियाज़ अल असअद इनमें से एक हैं, जो वर्षों बाद कोमा से बाहर आए और उन्होंने सीरिया पर रूस के हवाई हमलों पर चिंता व्यक्त की। 

उन्होंने एक आश्चर्यजनक दावा किया कि रूस का लक्ष्य, आईएसआईएल से युद्ध नहीं बल्कि रूस सुन्नी समुदाय को तबाह करने के कोशिश है। हालाँकि पुतिन ने कभी भी इस्लाम विरोधी टिप्पणी नहीं की, मगर वे तमाम मुस्लिम देशों द्वारा समर्थित इस्लामिक आतंकवाद के विरोधी माने जाते हैं। उन्होंने हाल ही में एक बयान ऐसा दिया जिससे पुरे विश्व में खलबली मच गई, उन्होंने कहा – बमबारी करके सऊदी अरब को फिर से ‘पाषाण युग’ में पहुंचा देंगे!!

* शिंजो अबे

शिंजो अबे दिसंबर 2012 से जापान के प्रधानमंत्री पद पर बने हुए हैं।  इन्होंने पूर्व में भी (2006 से 2007 तक) जापान के प्रधानमंत्री पद को सम्भाला था। अबे लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) और ओयागाकू प्रणोदन संसदीय समूह के अध्यक्ष हैं। आपको बता दें कि जापान में किसी भी बाहरी मुसलमान को स्थायी रूप से रहने की इजाजत नहीं दी जाती है। 

वहां जितने भी मुस्लिम है वे काफी समय पूर्व से वहां रह रहे हैं। यही कारण है कि आपने आज तक यह नहीं सुना गया कि जापान में कोई आतंकवादी हमला हुआ हो या इस्लाम के नाम पर बम धमाका हुआ हो। वहां काम करने वाले मुस्लिम कर्मचारियों के लिए भी जापानी में बोलना और जापानी भाषा में ही व्यवहार करना आवश्यक है। कहा जाता है कि जापान के इस मुस्लिम विरोधी वातावरण के लिए शिंजो अबे प्रशासन भी लगातार कार्यरत रहता है।