1 दंगे से मोदी "मौत के सौदागर" हो गए, अनगिनित दंगों के बाद ममाता "दंगों की सौदागर" क्यों नहीं ?



कहते हैं कि इतिहास खुद को दोहराता जरूर है, वर्ष 2002 में जब गुजरात में दंगे हुए थे तो गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को दोषी ठहराया गया था और अब भी उन्हें दोषी बताया जाता है, उस दंगे के लिए नरेन्द्र मोदी पर इस कदर दोष मढ़ा गया कि मोदी के खिलाफ सीबीआई जांच हुई, SIT बिठाई गयी, सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचा लेकिन वे निर्दोष साबित हुए. खुद ममता बनर्जी भी गुजरात दंगे के लिए मोदी को ही जिम्मेदार ठहराती हैं. जब ममता बनर्जी कोई राजनीतिक भाषण देती हैं तो गुजरात दंगे की चर्चा जरूर करती हैं और मोदी को दोष देती हैं.

अब आप खुद देखिये, बंगाल में दंगे हो रहे हैं तो ममता बनर्जी खुद को बचा रही हैं जबकि उन पर मुस्लिम तुस्टीकरण के आरोप लग रहे हैं, अब ममता बनर्जी का कहना है कि केंद्र सरकार उनकी मदद नहीं कर रही है इसलिए दंगे भड़क रहे हैं.

आप खुद सोचिये, मोदी को गुजरात दंगे के लिए किस तरह से फंसाया गया होगा, ये ममता बनर्जी खुद हर रैली में गुजरात दंगे की चर्चा जरूर करती हैं और मोदी पर आरोप मढ़ती हैं लेकिन अब खुद पर बीत रही हैं तो केंद्र सरकार पर दोष मढ़ रही हैं, जब ये गुजरात दंगे के लिए मोदी को जिम्मेदार ठहरा सकती हैं तो बंगाल दंगे के लिए खुद दोषी क्यों नहीं हो सकती हैं.

बताया जा रहा है कि जब बंगाल के मुस्लिम हिन्दुओं के घर और उनकी दुकानें जला रहे थे पुलिस खामोश बैठी थी, दूर खड़ी तमाशा देख रही थी और पुलिस को कार्यवाही ना करने का आदेश खुद ममता बनर्जी ने दिया था और इसी बात को लेकर राज्यपाल ने उन्हें कड़ी फटकार भी लगाई थी.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बंगाल के नार्थ परगना जिले में दंगे चल रहे हैं, ममता बनर्जी पर मुस्लिम तुस्टीकरण के आरोप लग रहे हैं, पुलिस शांत बैठी है और ममता बनर्जी आरोप लगा रही हैं कि केंद्र सरकार हमारी मदद नहीं कर रही है.

दंगाइयों को नहीं पकड़ रही ममाता बनर्जी, क्यूंकि दंगाई उन्ही की पार्टी के कार्यकर्त्ता नेता, और  स्थानीय जिहादी यानि ममाता के वोटबैंक है 
मोदी 1 दंगों के बाद मौत के सौदागर बन गए, पर ममाता है की अनगिनित दंगों के बाद भी "सेक्युलर" बनी हुई है