हामिद अंसारी ने खोली कांग्रेस की पोल, पिछली सरकारों को दिखाया आइना, "नहीं बना सके 1 राइफल"


अपने कार्यकाल के लगभग अंतिम समय में देश की वर्तमान सैन्य चुनौतियों पर इस प्रकार से बोलना उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का सुखद रहा और इस से देश की सैन्य शक्ति को एक बार फिर से पुनर्निर्मित करने और पुनर्जागृति करने का संदेश भी गया है .. 

ये संदेश उन पिछली सरकारों के लिए भी था जिन्होंने आतंक प्रभावित देश की सूची में बहुत ऊपर भारत की सेना और उसके नागरिकों के साथ इस प्रकार से घोर संवेदनहीनता दिखाई ..

देश के भीतर रिसर्च पर कमी और रक्षा क्षेत्र में दूसरे देशों पर ही आश्रित होने पर उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने अफसोस जाहिर किया है। इसके साथ ही उपराष्ट्रपति ने हथियारों के परीक्षण के समय नाकामयाब होने की खबरों पर सरकारों के अनुसंधान पर जोर ना देने पर भी चिंता जताई है। 

उपराष्ट्रपति का कहना है कि भारत अपनी जीडीपी का महज 0.9 फीसदी वैज्ञानिक अनुसंधान पर खर्च करता है, जबकि दूसरे देश इस पर ज्यादा ध्यान देते हैं।

उन्होंने कहा कि हमारे मुकाबले चीन वैज्ञानिक अनुसंधान पर 2, जर्मनी 2.8 और इस्राइल 4.6 फीसदी खर्च करता है। इसके साथ ही कहा कि आजादी के इतने साल बाद भी हमारा देश अपनी रक्षा जरूरतों का 60 फीसदी से ज्यादा आयात कर रहा है, ये सोचने की बात है कि हम अपने सशस्त्र बलों के लिए एक ढंग की राइफल भी नहीं बना पाए। 

हामिद अंसारी ने कहा कि देश में विशुद्ध विज्ञान विषयों में पीएचडी करने वालों की संख्या बेहद कम है वहीं अनुसंधान एवं विकास में सरकार की कोशिशें भी काफी नहीं हैं। गौरतलब है कि हाल ही में थलसेना की ओर से किए गए फायरिंग परीक्षण में देश में बनाई गई एक रायफल के फेल हो गई थी।