सत्ता आते ही सोनिया-मनमोहन ने बैन ही कर दिया था संसद में 1999 के बलिदानियों पर कार्यक्रम !



कांग्रेस को सत्ता से गए हुए 3 सालों से अधिक का समय हो गया है 
पर आज भी कांग्रेस पर एक के बाद एक बड़े बड़े खुलासे होते है, इनके कारनामो की लिस्ट ही इतनी बड़ी है की ख़त्म ही नहीं होती 

1999 में पाकिस्तान से भारत का युद्ध हुआ था जिसे हम कारगिल युद्ध के नाम से भी जानते है 
इस युद्ध में सैंकड़ो भारतीय सैनिको ने अपना बलिदान देकर कारगिल पर फिर तिरंगा फहराया था 

1999 के बाद से ही जुलाई में हर साल संसद और देश में बलिदानियों की याद और भारत की जीत पर कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है 

1999 के बाद से 2003 तक देश में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार रही 
हर साल संसद में कारगिल विजय दिवस मनाया जाता रहा, पर जैसे ही मई 2004 में कांग्रेस के पास सत्ता आयी 

सोनिया अघोषित प्रधानमंत्री और मनमोहन रबर स्टाम्प प्रधानमंत्री बने 
संसद में कारगिल विजय दिवस के कार्यक्रम पर ही बैन लगा दिया गया, आप जानकर चौंक जायेंगे की 2004 से लेकर 2009 तक भारत की संसद में कारगिल के बलिदानियों का सम्मान ही नहीं किया गया, उनके याद में मनाया जाने वाला कारगिल विजय दिवस मनाया ही नहीं गया 


जुलाई 2009 में NDA के राज्यसभा सांसद राजीव चंद्रशेखर ने इसपर आपत्ति दर्ज करवाई 
और हंगामा हुआ और कांग्रेस के इस कारनामे को अधिक तूल न मिले इसी कारण 2009 के बाद से कांग्रेस ने कारगिल विजय दिवस संसद में मनाना शुरू कर दिया 

5 साल तक इस देश की संसद और सरकार ने कारगिल के शहीदों का सम्मान ही नहीं किया 
ये कारनामा कर कांग्रेस ने पाकिस्तान के प्रति अपनी वफादारी को निभाई